4.1. रानी दुर्गावती से संबंधित प्रकाशित एवं अप्रकाशित साहित्य का संग्रहण।
4.2. रानी दुर्गावती से संबंधित रचनाकारों की काव्य गोष्ठी एवं सम्मेलन आयोजित करना।
4.3. रानी दुर्गावती से संबंधित विलुप्तप्राय पांडुलिपियों/रचनाओं का प्रकाशन कर संरक्षित करना।
4.4. रानी दुर्गावती से संबंधित विभिन्न विषयों पर अनुसंधान एवं ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करते हुए शोध परक जानकारी एकत्रित करना।
4.5. शैक्षणिक संस्थानों में रानी दुर्गावती से संबंधित साहित्यिक, सांस्कृतिक गतिविधियों एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन करना।
4.6 समाज के दूरस्थ ग्रामीणों एवं वनांचलों के निवासी, आर्थिक सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों एवं क्षेत्र के सर्वांगीण विकास हेतु शिक्षा, स्वास्थ्य तथा लोक संस्कार हेतु विधिक सेवा प्रकल्पों की योजना बनाकर उनका संचालन करना उन क्षेत्रों में इसी उद्देश्य से कार्यरत संस्थाओं को आवश्यक मार्गदर्शन, आर्थिक सहायता एवं सहयोग प्रदान करना।
4.7 पद 4.6 में उल्लेखित वर्गों की शिक्षा युगानुकुल शिक्षा पद्धति के माध्यम से प्राथमिक से लेकर उच्चतर, माध्यमिक, विश्वविद्यालय शिक्षा को प्रदान करने हेतु कार्यक्रमों, संस्थाओं योजनाओं का संचालन करना।
4.8. उल्लिखित वर्गों के स्वास्थ्य संवर्धन हेतु प्रचलित पारंपरिक पद्धतियों का विकास एवं संरक्षण कर उनके माध्यम से आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों की समस्त सुविधाओ को जुटाकर उचित प्रयास करना।
4.9. इन वर्गों के आर्थिक विकास हेतु पारंपरिक कौशल प्रदान कर उसका विकास करना। वनौषधि संग्रहण, पशुपालन, कृषि वन निधि संवर्धन, परंपरागत कुटीर उद्योग एवं अन्य सभी रोजगार से जुड़े क्षेत्रों में प्रशिक्षण, मार्गदर्शन एवं आवश्यक सहयोग प्रदान करना। आधुनिक प्रणालियों के माध्यम से आर्थिक विकास हेतु प्रयास करना। गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों का विकास करना। अधोसंरचनात्मक विकास हेतु योजनाओं का संचालन एवं क्रियान्वयन करना।
4.10. ऐतिहासिक बोध, सांस्कृतिक चेतना संवर्धन (कला समस्त विधाओं सहित सामाजिक संरचना संरक्षण आदि कार्यक्रमों का संचालन एवं क्रिया नियमन करना।)
4.11. पारंपरिक खेलों का संरक्षण एवं अन्य आधुनिक खेलों के प्रति रुचि एवं सुविधाओं प्रशिक्षण आदि का प्रबंधन करना एवं युवा कल्याण हेतु युवा मंडलों की रचना, व्यावसायिक प्रशिक्षण, संस्कार, योग शिक्षा आदि विधाओं पर कार्य करना।
4.12. मातृशक्ति के उत्थान हेतु विस्तार कार्यक्रम का संचालन, पोषाहर एवं विकास के क्षेत्र में कार्यक्रम संचालित करना।
4.13. संबंधित क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के योगक्षेम की व्यवस्था करना एवं तकनीकी व आर्थिक सहयोग प्रदान करना।
4.14. उल्लिखित क्षेत्रों में दृश्य श्रव्य एवं प्रशासन माध्यमों से संबंधित विषयों का प्रचार-प्रसार कर जनचेतना जागृत करना, संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान विकास हेतु पत्र पत्रिकाओं एवं शोध पत्रिकाओं का प्रकाशन करना।
4.15. संबंधित क्षेत्रों में कार्यक्रम संचालन हेतु उचित प्रशिक्षण एवं उचित मार्गदर्शन की व्यवस्था करना।
4.16. संस्था के सुचारू संचालन हेतु बिना लाभ हानि के आधार पर कार्यक्रम चलाना चल एवं अचल संपत्तियों को क्रय विक्रय कर दान अनुदान के स्वरूप में प्रदान करना।
4.17. न्यास के उद्देश्य की पूर्ति हेतु समस्त कार्य करना।